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Monday, 13 September 2021

Art of living...

 निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु ।

लक्ष्मी: समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम् ।।

अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा ।

न्याय्यात्पथ: प्रविचलन्ति पदं न धीरा: ।। ( भर्तृहरि )


अर्थ :- नीति को जानने वाले लोग चाहें निन्दा करें या प्रशंसा , अपनी इच्छानुसार धन की देवी लक्ष्मी आए या जाए, मृत्यु अभी हो या चिरकाल के बाद, परन्तु धैर्यवान् लोग न्याय के मार्ग से विचलित नहीं होते हैं ।

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