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Sunday, 5 September 2021

कार्यशाला प्रतिवेदन

कार्यशाला प्रतिवेदन

(23.03.2018)

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र के शिक्षा विद्यापीठ द्वारा पं. मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन, मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली के अन्तर्गत ‘एस.पी.एस.एस. के माध्यम से सामाजिक विज्ञानं में अनुप्रयुक्त सांख्यिकीय विधियाँ’ विषय पर सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ( 21.03.2018 से 28.03.2018 तक ) का आयोजन किया जा रहा है।

          आज दिनांक 23.03.2018 को इस कार्यशाला का तृतीय दिवस था। कार्यशाला के प्रथम सत्र ( 10:00 AM से 12:00 PM ) की व्याख्याता प्रो. रेखा शर्मा, उपनिदेशक, मानव संसाधन विकास केन्द्र, नागपुर विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र थी। इनके व्याख्यान का विषय “बुनियादी वर्णनात्मक प्रदत्तों का एस.पी.एस.एस. में उपयोग” था। प्रो. रेखा शर्मा नें अपनें व्याख्यान के प्रारम्भिक चरण में सांख्यिकीय विधियों के बारे में संक्षिप्त में अवधारणात्मक जानकारी प्रदान की। इन्होंनें प्राचल व अप्राचल सांख्यिकीय विधियों पर चर्चा के साथ हीं मापन के विभिन्न स्तर जैसे – नामित, क्रमित, अन्तरित एवं आनुपातिक पर भी प्रकाश डाला। प्रो. रेखा महोदया नें एक्सल सॉफ्टवेयर पर विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को अभ्यास कराया। महोदया नें उदाहरण के रूप में प्रतिभागियों को कई प्रकार के आँकड़े भी दिये तथा उन्होंनें एस.पी.एस.एस. के माध्यम से कैसे विश्लेषण किया जाता है, यह समझानें का प्रयास किया। इसके बाद  12:00 PM पर चाय अन्तराल हुआ।

पुनः चाय अन्तराल के बाद 12:20 PM से कार्यशाला का द्वितीय सत्र प्रारम्भ हुआ। इस सत्र की व्याख्याता भी प्रो. रेखा शर्मा हीं थी। इन्होंनें प्रथम सत्र के व्याख्यान विषय को हीं और आगे बढ़ाया। द्वितीय सत्र में महोदया नें वर्णनात्मक विश्लेषण एस.पी.एस.एस. पर कैसे किया जाता है, इसको बताने का प्रयास किया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रदत्त विश्लेषण करना सीखाया। इसके साथ हीं नामित स्तर के आँकड़ो के विश्लेषण पर भी विस्तार पूर्वक चर्चा अभिव्यक्त की।। प्रो. रेखा शर्मा नें द्वितीय सत्र में अवधारणात्मक जानकारी के बजाय प्रदत्तों के विश्लेषण के अभ्यास कार्य पर अधिक बल दिया। इस प्रकार प्रो. रेखा शर्मा के द्वितीय सत्र का व्याख्यान 01:50 PM पर समाप्त हुआ। इसके बाद 01:50 PM से 03:00 PM तक भोजन अन्तराल हुआ। तत्पश्चात् कार्यशाला का तृतीय सत्र प्रारम्भ हुआ।

          कार्यशाला के तृतीय सत्र ( 03:00 PM से 04:30 PM ) के व्याख्याता प्रो. वी.पी. सिंह ( NCERT, नई दिल्ली ) थे। इन्होंनें एस.पी.एस.एस. से आप लोग क्या समझते हैं ? एस.पी.एस.एस. क्या है ? इसका उपयोग कहाँ होता है ? इसकी प्रासंगिकता एवं उपयोगिता क्या है ? इत्यादि प्रश्नों की श्रृंखला से तृतीय सत्र का शुभारम्भ किया। इन्होंनें एस.पी.एस.एस. से जुड़े व्यावहारिक जानकारी के साथ हीं साथ नवीनतम तथ्यों से भी अवगत कराया। प्रो. वी.पी. सिंह नें विभिन्न उदाहरणों एवं कहानियों के माध्यम से एस.पी.एस.एस. की उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक चर्चा अभिव्यक्त की। इन्होंनें एस.पी.एस.एस. से Matrix का Invers कैसे निकालते हैं ? तथा एक्सल से Matrix का Invers कैसे निकालते हैं ? जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न प्रतिभागियों से किया तथा इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रो. सिंह नें मध्यमान, मध्यांक तथा बहुलांक पर बात करते हुए प्रतिभागियों के पूर्व ज्ञान को जाननें का प्रयास किया। t – Test किसे कहते हैं ? तथा इसका उपयोग कहाँ किया जाता है ? आदि प्रश्नों पर चर्चा करनें के साथ हीं साथ महोदय नें प्रतिदर्श डिजाईन व सर्वे आदि महत्वपूर्ण सम्प्रत्ययों के सन्दर्भ में भी जानकारी प्रदान की। प्रो. वी.पी. सिंह महोदय नें शोध प्रारूप के चरण व इसके विभिन्न पहलुओं पर भी बात की तथा मानक विचलन एवं मध्यमान पर भी विस्तार से चर्चा किया।

            प्रो. वी.पी. सिंह महोदय नें अपनें रोचक व्याख्यान और सरल व सहज अभिव्यक्ति से कार्यशाला को आनन्दपूर्ण बनाया। महोदय नें अपनें व्याख्यान विषय ‘t – Test का अनुप्रयोग’ के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। तृतीय सत्र का व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण, प्रासंगिक व उपयोगी रहा। इस प्रकार महोदय का व्याख्यान 04:30 PM तक चला। तत्पश्चात्  04:30 PM से 04:40 PM तक चाय अन्तराल हुआ।

          चाय अन्तराल के बाद पुनः चतुर्थ सत्र आरम्भ हुआ। चतुर्थ सत्र ( 04:40 PM से 06:10 PM ) की व्याख्याता डॉ. सुदेशना लाहिड़ी, सह प्रोफेसर कलकत्ता विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल थी। इनके व्याख्यान का विषय ‘t – Test का निष्कर्ष व एस.पी.एस.एस. के माध्यम से इसका उपयोग’ था। डॉ. सुदेशना लाहिड़ी नें प्रतिभागियों के विषयगत पृष्ठभूमि जाननें के बाद अपना व्याख्यान प्रारम्भ किया। इन्होंनें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सांख्यिकीय की विश्वसनीयता को समझानें का प्रयास किया। सरल व सहज वाणी के द्वारा महोदया नें प्रतिभागियों को अभिप्रेरित करनें के साथ हीं साथ विभिन्न सम्प्रत्ययों को स्पष्ट किया। इसके साथ हीं साथ महोदया नें t – Test तथा सांख्यिकीय अवधारणाओं के सैद्धान्तिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला। इस प्रकार तृतीय दिवस के सभी सत्र पूर्व निर्धारित समयानुसार विधिवत् सम्पन्न हुए।

*प्रतिवेदन प्रस्तुतकर्त्ता*

*रंजय कुमार पटेल (शोधार्थी), शैक्षिक अध्ययन विभाग, शिक्षा संकाय, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, पूर्वी चम्पारण, (बिहार), 845401. मो. +91-7355738854 ईमेल- sagarranjay@gmail.com


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