अलविदा इब्राहिम सदा के लिए
"हमें नहीं पता हमको गीता का ज्ञान था कि नहीं।हमें नहीं पता तुम्हें क़ुरान का ध्यान था कि नहीं।।हमें नहीं पता हममें राम की मर्यादा थी कि नहीं।हमें नहीं पता तू पैग़म्बर का पैगाम था कि नहीं।।फिर भी तुम्हें अपना कहने की चाहत थी सभी को।और लबों तक आते-आते तुम गैर हो गये।।
#संबंधित पोस्ट हमारे एम.एड. की कक्षा (2015-17) के सहपाठी श्रीमान् मोहम्मद इब्राहिम अली के इंतकाल की है. प्राप्त सूचना के अनुसार ट्रेन में सफर के दौरान हादसे की चपेट में आने से आप ट्रेन से नीचे गिर पड़े और कल देर रात इलाज के दौरान आपका इन्तकाल हो गया. आपकी असामयिक मृत्यु का दुःखद समाचार पाकर हम सभी आहत, भावशून्य एवं निःशब्द ही हो गये हैं. भारी मन के साथ निगाहें बार-बार भर ही आ रही हैं. हालांकि कटु सत्य को स्वीकार करने के अतिरिक्त हम लोगों के पास अब कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. लेकिन फिर भी समाचार मिलते ही मैं आपके नम्बर पर इस उम्मीद के साथ कॉल किये जा रहा हूँ कि काश यह खबर झूठी सिद्ध होती. जिस पर कि कोई भी प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो रही है, आखिर होगी भी तो कैसे? साथी आप हम लोगों से नाराज होकर इतनी जल्दी जन्नत जो चले गये. यकीन ही नहीं होता कि अब आप हमारे बीच नहीं रहे. आप हम सभी के बीच की दोस्ती के 'दिल की धड़कन' थे. अत्यन्त अल्प समय में आपका जीवन ही हम सभी साथियों के लिए वास्तविक शिक्षा का मार्ग प्रशस्त कर गया. आपका व्यवहार, सादगी, शालीनता, विनम्रता, हँस मुख चेहरा, बात करने का तरीका व जीवन जीनें का अंदाज अनूठा था. आप हम सभी अनन्य मित्रों में से एक थे. आपके अचानक यूँ चले जाने से हम सभी साथियों के हृदय में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसका स्थान अब कदाचित् पूर्ण नहीं हो सकता. आपकी दोस्ती हम सभी के लिए जाति, धर्म और भाषा आदि से परे थी. आप दोस्ती की वह मिशाल कायम करके चले गये जिसके आगे हम सभी नतमस्तक हैं. मैं आपको अक्सर घूमने के लिए बनारस की धरती पर बुलाया करता था तब आप सदैव 'जी दोस्त! मेरी कोशिश रहेगी आपके साथ घूमने की' ऐसा कहकर टाल दिया करते थे. अब आप नहीं रहे, रह गई आपकी सिर्फ यादें. हे प्रिय! एक अच्छे दोस्त को सदा के लिए खोने का गम हम सभी साथियों को निरन्तर सताता रहेगा. ऐ ! अपनों से दूर जा चुके मुसाफिर, आपके लिए हम सभी साथियों की परमपिता परमेश्वर से यह सामूहिक प्रार्थना है कि वह आपकी आत्मा को अपनी शरण प्रदान करे एवं आपके शोकाकुल परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की सामर्थ्य प्रदान करे. इसी के साथ मुझे माफ़ कर देना मेरे दोस्त क्योंकि मुझे पता है कि इस मैसेज को आप अब कभी भी नहीं पढ़ पाओगे, लेकिन फिर भी आपको आखिरी बार फेसबुक पर टैग कर रहा हूँ.
अंततोगत्वा सामूहिक रूप से हम सभी साथियों की तरफ से भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि यार. हम सभी साथी आपकी कमी को सदैव महसूस करते रहेंगे.
अलविदा इब्राहिम सदा के लिए








No comments:
Post a Comment